UPI पर टैक्स का विरोध, राहुल गांधी बोले- इससे अमेरिका को फायदा; सरकार ने कहा- कोई विदेशी दबाव नहीं है

UPI पर टैक्स का विरोध, राहुल गांधी बोले- इससे अमेरिका को फायदा; सरकार ने कहा- कोई विदेशी दबाव नहीं है

Rahul Gandhi on UPI Tax: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार (16 सितंबर) को यूपीआई (UPI) पर टैक्स लगाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। इंदिरा जी हमेशा सीधी खड़ी रहती थीं, पर यह सरकार आज अमेरिका के सामने दंडवत हो गई है। UPI पर सरकार के फैसले से अमेरिका को फायदा होगा।

इसके बाद वित्त मंत्रालय ने UPI नियमों में बदलाव पर विदेशी दबाव के दावों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि UPI से जुड़े फैसले भारत की घरेलू जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं। इनका लक्ष्य टिकाऊ, समावेशी और सस्ता डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाना है।

सरकार ने कल दिया था आदेश

दरअसल, सरकार ने मंगलवार को आदेश दिया था कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। यह शुल्क मर्चेंट से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं होगा। सरकार के अनुसार करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन भी इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे।

जिरोधा के फाउंडर ने कहा– मर्चेंट और ब्रोकर के बीच बड़ा फर्क है

भारत की सबसे बड़ी स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने कहा कि UPI का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होने लगा है, जिसके बाद MDR शायद जरूरी हो, लेकिन इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे मामलों में मौजूदा एमडीआर फ्रेमवर्क प्रैक्टिकल नहीं लगता। उनके मुताबिक, सामान्य मर्चेंट और ब्रोकर के बीच बड़ा फर्क है।

नितिन ने उदाहरण देकर समझाया- अगर कोई ग्राहक ₹20,000 का सामान खरीदता है और UPI से भुगतान करता है, तो मर्चेंट को उसके बदले बिक्री से कमाई होती है। यानी पेमेंट सीधे कारोबार से जुड़ा है। लेकिन, ब्रोकर के मामले में कस्टमर UPI से ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में डाल सकता है और उस दिन एक भी शेयर नहीं खरीद सकता। ऐसे में ब्रोकर को ट्रांजैक्शन से कोई ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिला, लेकिन UPI पेमेंट से जुड़ा MDR खर्च उसके ऊपर आ सकता है। यही वह अंतर है, जिस पर कामथ ने सवाल उठाया है।

MDR यानी Merchant Discount Rate

यह क्या है?

दुकानदार से डिजिटल पेमेंट लेने के बदले ली जाने वाली फीस

इस उदाहरण से समझिए

ग्राहक ने दुकान पर ₹5,000 UPI से पेमेंट किया

दुकानदार को ₹5,000 का पेमेंट मिला

MDR 0.4% लगेगा

₹5,000 का 0.4% = ₹20

बैंक या पेमेंट सिस्टम दुकानदार से ₹20 MDR फीस लेगा

MDR ग्राहक की फीस नहीं, दुकानदार से जुड़ा चार्ज है।

MDR का रेट पेमेंट की रकम का एक छोटा प्रतिशत होता है।

विपक्ष ने कहा– UPI पर शुल्क से महंगाई बढ़ेगी

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को कहा कि UPI पर सरकार के फैसले का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और छोटे व्यापारियों का डिजिटल कारोबार प्रभावित होगा।

RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि यह फैसला सरकार ने अपनी मर्जी से या अपनी सूझबूझ से नहीं लिया है। अमेरिकी साम्राज्यवाद की बात करें तो यह उसके सामने झुकने जैसा है। उन्होंने अब 2,000 रुपये से कम के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने का स्पष्टीकरण दिया है। पहले उन्होंने लोगों को डिजिटल लेन-देन की ओर धकेला। अब देखिए इससे कितनी चीजों पर और किस तरह असर पड़ेगा।

UPI का नया नियम, 5 बड़ी बातें

1- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजना पूरी तरह से फ्री रहेगा।

2- ₹2,000 तक ग्राहक से दुकानदार को भुगतान फ्री रहेगा।

3- ₹2,000 से ज्यादा अमाउंट पर दुकानदार को मिलने वाले पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा।

4- कैलकुलेशन के मुताबिक, ₹75,000 या उससे ज्यादा के हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 ही फीस लगेगी।

5- रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और ईधन जैसी चुनिंदा कैटेगिरी में ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रति ट्रांजेक्शन ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा।

सरकार ने छोटे दुकानदारों के लिए प्रोत्साहन योजना भी शुरू की थी

सरकार ने UPI को प्रमोट करने और फ्री रखने के लिए 2021-22 से प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत ग्राहक से छोटे दुकानदार को होने वाले ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर 0.15% इंसेंटिव दिया जाता था। 2024-25 तक इस पर ₹8,276 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया। देश में जून 2026 तक करीब 55.5 करोड़ UPI यूजर्स थे।

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