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ओपीएस, रेगुलराइजेशन, टीईटी को लेकर कर्मचारी करेंगे राष्ट्रीय रैली: सुभाष लांबा
Lucknow: अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने दो टूक कहा कि राज्य सरकारों की लगातार उपेक्षा से नाराज लाखों राज्य कर्मचारी अब निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेंगे। कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय कर्मचारी रैली आयोजित की जाएगी। यह रैली पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, पीएफआरडीए एक्ट तथा एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करने, सभी प्रकार के ठेका, संविदा, आउटसोर्सिंग एवं दैनिक वेतन कर्मचारियों को नियमित करने, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को शीघ्र कर्मचारी हितैषी सिफारिशें देने, सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने और खाली पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है। महासंघ द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को भेजे गए ज्ञापन को आधार बनाकर कर्मचारियों की वेतन संबंधी मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बेसिक पे का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम 5,000 रुपये अंतरिम राहत, 3.8 फिटमेंट फैक्टर, इन्क्रीमेंट की दर 5 प्रतिशत करने, दस वर्ष के बजाय प्रत्येक पांच वर्ष में वेतन पुनरीक्षण, ग्रुप-डी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये तथा आबादी के आधार पर 30 से 40 प्रतिशत एचआरए शामिल हैं।
केंद्र एवं राज्य सरकारें कर्मचारियों के मुद्दों को टाल रही
ओपीएस की बहाली और ठेका-संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांगों में हैं। इसके बावजूद केंद्र एवं राज्य सरकारें इन मुद्दों को लगातार टाल रही हैं। सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें स्थायी भर्ती के माध्यम से भरकर बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाना चाहिए। रैली की तैयारियों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में देशभर में व्यापक जनसंपर्क एवं जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि सितंबर में सभी राज्यों में राज्य कमेटियों की बैठकें आयोजित कर रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। अक्टूबर में जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद सभी विभागों में गेट मीटिंग, कर्मचारी संपर्क अभियान और जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर तक सभी कार्यालयों एवं स्कूलों में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे तथा स्थानीय भाषाओं में प्रचार सामग्री वितरित की जाएगी। नवंबर में अभियान को और तेज करते हुए कर्मचारियों को दिल्ली रैली में बड़ी संख्या में भागीदारी के लिए लामबंद किया जाएगा। लांबा ने कहा कि 12 दिसंबर की राष्ट्रीय रैली कर्मचारियों की लंबित मांगों को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक मजबूती से पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच होगी। उन्होंने देशभर के राज्य सरकारी कर्मचारी संगठनों से रैली की व्यापक तैयारियों में जुटने और कर्मचारियों को संगठित करने का आह्वान किया।
