वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 से घोषणा पत्र हटा, बदलाव केवल SIR हुए राज्यों में

वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 से घोषणा पत्र हटा, बदलाव केवल SIR हुए राज्यों में

SIR Form 6: केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। यानी SIR पूरा होने के बाद फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी। हालांकि, जिन राज्यों में SIR जारी है, वहां फॉर्म 6 में यह घोषणा अब भी दिख रही है। यह बदलाव मंगलवार देर रात ECINET पोर्टल पर किया गया।

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को इसका ऐलान किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस पर आपत्ति जताई थी। फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए होता है।

वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 से घोषणा पत्र हटा, बदलाव केवल SIR हुए राज्यों में

नए बदलाव के मायने

  • जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां फॉर्म-6 से SIR वाला अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। इसलिए नाम दोबारा जुड़वाने के लिए यह बताना जरूरी नहीं होगा कि आपका या माता-पिता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में था या नहीं।
  • घोषणा-पत्र हटने का मतलब जांच खत्म होना नहीं है। Form 6 की सामान्य प्रक्रिया और मतदाता बनने की पात्रता की जांच पहले की तरह रहेगी।
  • जो पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं, उन्हें भी फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ा विवरण देने की अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी। इससे पहली बार नाम जुड़वाने की प्रक्रिया आसान होगी।
  • पुरानी वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच और मिलान के लिए इस्तेमाल हो सकती है। बस फॉर्म-6 में उससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र देना जरूरी नहीं रहेगा।
  • इस बदलाव का सीधा फायदा दोनों तरह के वोटर्स को, जिनका नाम SIR में कट गया है और जो पहली बार वोटर बन रहे हैं। दोनों के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया से एक अतिरिक्त घोषणा हट गई है। खासकर नए वोटर्स के लिए यह आसान होगा, क्योंकि उन्हें पुराने वोटर रिकॉर्ड में माता-पिता या दादा-दादी का नाम खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था

  • फॉर्म 6 नए मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए होता है। SIR के दौरान इसके ऑनलाइन फॉर्म में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई।
  • इसमें पूछा गया था कि आवेदक या उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में था या नहीं।
  • अगर नाम था, तो EPIC नंबर, राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र, पार्ट नंबर और सीरियल नंबर जैसी जानकारी मांगी जाती थी।

रिपोर्ट– दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि नियमों में बदलाव किए बिना वैधानिक फॉर्म 6 में नया हिस्सा जोड़ दिया गया।

विवेक जोशी ने कहा कि फॉर्म 6 नियमों के तहत तय फॉर्म है, इसलिए इसमें बदलाव के लिए पहले नियमों में संशोधन जरूरी है। वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े गए हिस्से को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए उसे हटाने की बात कही थी।

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