Ayodhya News: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद अब रामलला की पूजा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किया गया है। पूजा व्यवस्था के संचालन के लिए गठित नई धार्मिक समिति ने पूजा अर्चना को रामानंदी परंपरा के मुताबिक कड़ाई से पालन करने की व्यवस्था की है। अब पुजारियों के लिए ड्रेस कोड बनाया गया है।
इसके मुताबिक, पुजारियों को पीत वस्त्र धारण करना होगा। साथ में वे दाढ़ी-मूंछ व केश रखेंगे अथवा क्लीन सेव रहना होगा। रोजाना धुली पीले रंग की ड्रेस पहननी होगी जो रेशमी अथवा सूती कपड़े की हो सकती है।
सूतक के दौरान गर्भगृह में प्रवेश नहीं
धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने बताया कि यदि किसी पुजारी के घर में किसी का जन्म अथवा मृत्यु होती है तो सूतक के दौरान रामलला के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करेगा। शुद्धिकरण के बाद ही वह पूजा कर सकेगा। पुजारी ही रामलला के गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे। उनको रामानंदी परंपरा में दीक्षित होना व तुलसी की माला धारण करना भी अनिवार्य किया गया है। ड्यूटी के दौरान शौच आदि पर जाने पर पुनः शुद्ध होने के लिए स्नान के साथ धुली ड्रेस धारण करना होगा।
महंत राजकुमार दास ने बताया कि पूजा पद्धति और पुजारियों के लिए कुछ नियम पहले से बने थे जिनका कड़ाई से पालन नहीं हो रहा था। राम मंदिर की धार्मिक समिति की 12 सितंबर की बैठक में विस्तार से समीक्षा के बाद पूजा व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया गया है। महंत राजकुमार दास ने बताया कि मंदिर में व्यवस्था ऐसी बनाई जा रही है जिससे परिसर का वातावरण धार्मिक बने।
भजन से होगी रामलला की जागृति
महंत ने बताया कि मंदिर में पूजा के दौरान राग भोग की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब सुबह मंगला आरती के पहले प्रभु रामलला को जगाने के लिए उनके बाल रूप के मुताबिक भजन का गायन किया जाएगा। इसके लिए अयोध्या के मंदिरों से गायकों की टीम को लगाया जाएगा। हर समय के भोग का मीनू अलग-अलग रहेगा जिसे परिसर के ग्रीन हाउस के पास बने रामलला के भोग के किचन में तैयार किया जाएगा। इसमें दाल-चावल, सब्जी-खीर, पूआ-पूड़ी-कचौड़ी-हलवा आदि को शामिल किया गया है।
महंत राजकुमार दास ने बताया कि पुजारियों के लिए गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर बयानबाजी पर भी रोक लगाई गई है।
