Agniveer Service Policy: अग्निवीर अब 4 नहीं, 6 साल तक नौकरी कर सकेंगे। इसके बाद वे सेना में बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। पास हुए, तो परमानेंट कमीशन भी मिलेगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को यह ऐलान किया। इससे तीनों सेनाओं में तैनात करीब 3.18 लाख अग्निवीरों को फायदा होगा।
दो साल की अतिरिक्त नौकरी में अग्निवीरों को बढ़ी हुई सैलरी-भत्ते मिलेंगे। इससे पहले हर बैच के 25% को मेरिट के आधार पर नियमित सैनिक बनाने और बाकी 75% को चार साल की सर्विस के बाद फोर्स छोड़ने का प्रावधान था।
नए अग्निवीर नियमों में 5 बड़े बदलाव
- सेवा अवधि 6 साल तक: शुरुआती 4 साल की सेवा के बाद 75% अग्निवीरों को 2 साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा।
- नियमित सैनिक बनने का दूसरा मौका: अतिरिक्त 2 साल पूरे होने पर अग्निवीरों को परमानेंट सैनिक बनने का एक और अवसर दिया जाएगा।
- 25% का पुराना प्रावधान बरकरार: शुरुआती 4 साल पूरे होने पर 25% अग्निवीरों का मेरिट के आधार पर परमानेंट सर्विस में चयन पहले की तरह होगा।
- अतिरिक्त सेवा में ज्यादा वेतन: दूसरे 2 साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों को पहले से अधिक वेतन दिया जाएगा।
- सेवा निधि और वरिष्ठता में बदलाव: छह साल बाद परमानेंट किए गए अग्निवीरों की वरिष्ठता, चार साल बाद चुने गए 25% अग्निवीरों से नीचे होगी।
दिसंबर तक 18,300 अग्निवीरों का कार्यकाल पूरा होना था
आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर तक पहले बैच के करीब 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। ये पहले बैच में भर्ती हुए 24,400 अग्निवीरों का करीब 75% हैं।
पहले तय योजना के मुताबिक नवंबर के मध्य से 75% अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जाना था। नई व्यवस्था के तहत अब इन्हें दो साल का अतिरिक्त समय मिलेगा। यह सेवा विस्तार अग्निवीरों की सहमति से होगा।
एयरफोर्स ने पहले बैच के 712 अग्निवीरों को परमानेंट किया
पिछले महीने एयरफोर्स ने अपने पहले अग्निवीर बैच के 2,850 रिक्रूट्स में से 712 को नियमित सेवा में बनाए रखने का फैसला किया था।
क्या है अग्निपथ योजना?
यह योजना 14 जून 2022 को शुरू हुई थी, जिसका आधिकारिक नाम ‘अग्निपथ योजना’ है और इसमें भर्ती युवाओं को ‘अग्निवीर’ कहते हैं। इसके जरिए 17.5 से 21 साल के युवाओं को तीनों सेनाओं में 4 साल के लिए भर्ती किया जाता है।
4 साल तक हर महीने सैलरी मिलती है और सेवा खत्म होने पर करीब 11.71 लाख रुपये एकमुश्त मिलते हैं, लेकिन इसमें पेंशन नहीं होती। 4 साल बाद सिर्फ 25% अग्निवीरों को ही सेना में परमानेंट रखा जाता है। बाकी 75% युवाओं को सेवा निधि देकर विदा कर दिया जाता है, जिन्हें पुलिस और सुरक्षा बलों की भर्तियों में छूट मिलती है।
