Protest in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी में शुक्रवार (25 सितंबर) को तेज बारिश के बीच इको गार्डन में ऑल टीचर्स एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। इसमें विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। प्रदर्शनकारी पुरानी पेंशन बहाल करने, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने और टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि संगठन लंबे समय से इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। प्रदर्शन में कर्मचारी, शिक्षक, किसान और युवा शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सुबह से तेज बारिश के बावजूद कर्मचारी इको गार्डन में डटे हैं। यह उनकी एकता और मांगों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। उन्होंने कहा कि बारिश या ओलावृष्टि के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और संगठन अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेगा।
निजीकरण युवाओं के भविष्य के लिए चुनौती
विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। लगातार ऐसी खबरें सामने आ आती हैं जिसमें ठेका और संविदा कर्मियों का जमकर शोषण होता है। 10 से 12 हजार रुपये में संविदा कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है।
पैसे कम और तनाव ज्यादा होने की वजह से कर्मचारी मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। जोर देते कहा कि जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं होती, निजीकरण पर रोक नहीं लगती और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती, तब तक अटेवा का संघर्ष जारी रहेगा।
2027 चुनाव के लिए चेतावनी
प्रदेश विधिक सलाहकार नरेंद्र कुमार ने पुरानी पेंशन को शिक्षकों और कर्मचारियों का संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि संगठन इस मांग को लेकर हर स्तर पर संघर्ष करेगा, आंदोलन को और मजबूत बनाया जाएगा। 2027 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाला है। इलेक्शन से पहले मांग पूरी नहीं हुई तो मौजूदा सरकार को इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।
