Iran US Deal Violation Allegations: ईरान ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) के तहत जारी होने वाली 6 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का एक हिस्सा जरूरी सामान खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक में सहमति बनी।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ बैठक में तय हुआ कि ईरान अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीदेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने लेबनान में युद्ध रोकने समेत समझौते की कुछ शर्तों का पालन नहीं किया।
आज बनेगी अलग कमेटी
बैठक में यह भी फैसला हुआ कि समझौते के उल्लंघन की निगरानी के लिए गुरुवार तक एक अलग कमेटी बनाई जाएगी, जहां किसी भी उल्लंघन की आधिकारिक शिकायत दर्ज की जा सकेगी। गरीबाबादी ने साफ किया कि दोहा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हुई। बातचीत कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अलग-अलग हुई।
अमेरिका-ईरान वार्ता की 5 बड़ी बातें
- दोहा में कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत हुई, दोनों देशों के अधिकारी आमने-सामने नहीं मिले।
- परमाणु कार्यक्रम, 6 अरब डॉलर के फ्रीज फंड और MoU लागू करने पर चर्चा हुई।
- ईरान ने अमेरिका पर समझौते की शर्ते तोड़ने का आरोप लगाया।
- समझौते के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए अलग मॉनिटरिंग चैनल बनाने पर सहमति बनी।
- कतर ने वार्ता को ‘सकारात्मक’ बताया, दोनों पक्ष जल्द अगले दौर की बातचीत करेंगे।
खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले ईरान हाई अलर्ट पर
पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले ईरान ने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। ईरानी सेना के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने कहा कि समारोह में शामिल होने वाले विदेशी नेताओं, धार्मिक हस्तियों और लाखों लोगों को देखते हुए सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
उन्होंने बताया कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने देशभर में अपनी तैनाती बढ़ा दी है। वहीं, एयर डिफेंस सिस्टम लगातार ईरान के हवाई क्षेत्र पर नजर रखे हुए है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।
ईरान युद्ध ने दुनिया के ऊर्जा बाजार को कैसे बदल दिया?
- तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
युद्ध शुरू होते ही कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ गए।
बाद में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने पर कीमतें फिर गिरने लगीं।
इससे वैश्विक तेल बाजार में लगातार अनिश्चितता बनी रही।
- होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा संकट बना
दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है।
युद्ध के दौरान जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई।
कई शिपिंग कंपनियों ने वैकल्पिक समुद्री रास्ते तलाशने शुरू कर दिए।
- ऊर्जा कंपनियों ने बदले सप्लाई रूट
कई देशों और कंपनियों ने तेल-गैस की सप्लाई के नए रास्ते खोजे।
मकसद था कि होर्मुज पर तनाव बढ़ने की स्थिति में सप्लाई न रुके।
- बाजार में अनिश्चितता बढ़ी
युद्ध की वजह से निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों में चिंता बढ़ी।
तेल और गैस की खरीद-बिक्री के फैसलों पर इसका असर पड़ा।
- असर लंबे समय तक रहेगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अमेरिका-ईरान के बीच समझौता हो जाए, लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की रणनीति हमेशा के लिए बदल दी है।
अब कई देश एक ही सप्लाई रूट या एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

