UP News: उत्तर प्रदेश में अब सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। साथ ही नियोक्ता के खर्च पर साल में एक बार श्रमिकों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार (25 अगस्त) को उत्तर प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्यदशा नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी। यह नियमावली केंद्र की उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्यदशाएं संहिता-2020 के प्रावधानों को प्रदेश में लागू करने के लिए तैयार की गई है।
नई व्यवस्था में नियोक्ताओं को अलग-अलग कानूनों के तहत अलग-अलग पंजीकरण से राहत मिलेगी। प्रतिष्ठानों के लिए एकल पंजीकरण और ठेका श्रमिकों, अंतरराज्यीय प्रवासी कर्मकारों सहित अन्य श्रेणियों के लिए एकीकृत व्यवस्था होगी। पंजीकरण, अभिलेख और ब्योरा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दाखिल की जा सकेंगी।
नियमावली में ये सुविधाएं
नियमावली में काम के घंटे, विश्राम, मजदूरी और छुट्टी के साथ कार्यस्थल पर पेयजल, शौचालय, स्नानागार, विश्राम कक्ष, कैंटीन व प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। गंभीर दुर्घटना या व्यावसायिक खतरे की सूचना सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी।
वहीं, महिलाओं को सहमति से सभी तरह के प्रतिष्ठानों और रात्रिकालीन ड्यूटी की अनुमति होगी। महिलाओं के रात्रिकालीन काम के लिए सहमति, सुरक्षित परिवहन और अन्य सुरक्षा उपायों जैसी शर्तें तय की गई हैं। संविदा व अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के साथ निर्माण, कारखाना, बागान, बीड़ी-सिगार और दृश्य-श्रव्य क्षेत्र के कामगारों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
अब ग्रेच्युटी एक साल की सेवा पर ही
नियमित कर्मचारियों, गिग वर्करों, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का कानूनी कवच देने के लिए उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा नियमावली 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। नियमावली के तहत तय अवधि पर काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को अब तीन के बजाय एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा।
प्लेटफॉर्म वर्कर, असंगठित और स्व-नियोजित श्रमिकों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। नियमावली में कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाने के साथ तय अवधि के कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रावधान किया गया है।
आवासीय भवन निर्माण लागत भी बढ़ाई
नियमावली में महिला कर्मचारियों के मातृत्व लाभ से जुड़े अधिकारों के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। रोजगार के दौरान दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कामगार या उनके पात्र आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। भवन व अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के लिए उपकर निर्धारण के लिए आवासीय भवन निर्माण की लागत की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है।
