Census 2027: खरगे-राहुल का PM को पत्र, की ये बड़ी मांग

Census 2027: खरगे-राहुल का PM को पत्र, की ये बड़ी मांग

Census 2027: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने सरकार से मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से परामर्श के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार्य नहीं है और सरकार को तेलंगाना तथा बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों से सीख लेनी चाहिए।

कांग्रेस ने मौजूदा प्रक्रिया को बतायागुमराह करने वाली

25 अगस्त को पत्र को लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जाति जनगणना को लेकर सरकार की मौजूदा कवायद महज ‘खानापूर्ति’ है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर यह तीसरा पत्र है, लेकिन अब तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला है। खड़गे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को हिंदी में यह पत्र लिखा था।

पत्र में दोनों नेताओं ने कहा कि भारत में सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सटीक आंकड़े बेहद जरूरी हैं। विभिन्न जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गणना सही तरीके से की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनगणना में जाति का विवरण दर्ज करने के लिए ‘ओपन-एंडेड’ सवालों का तरीका अपनाया है, जिसमें व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा।

एक जाति के कई नाम बने तो बिखर जाएगा पूरा आंकड़ा

खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। ऐसे में यदि एक ही जाति के लोगों के नाम अलग-अलग दर्ज किए गए तो एक जाति हजारों अलग-अलग नामों में बंट सकती है। इससे जातियों के नामों की संख्या बहुत अधिक हो जाएगी और जाति जनगणना से हासिल पूरा डेटा अनुपयोगी होने का खतरा है।

दोनों नेताओं ने कहा कि यदि किसी समुदाय की वास्तविक संख्या ही सही तरीके से दर्ज नहीं होगी तो उसकी सामाजिक स्थिति का आकलन भी गलत होगा। इसका सबसे अधिक नुकसान पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों को हो सकता है। इससे शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि मौजूदा प्रक्रिया से भारत में OBC की वास्तविक आबादी का पता नहीं चलेगा, क्योंकि इस जनगणना में ‘Backward Class’ यानी पिछड़ा वर्ग शब्द तक शामिल नहीं है।

ड्रॉपडाउनसूची का दिया सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

तेलंगानाबिहार मॉडल अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

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