Harish Rana Last Rites: देश में पहली बार इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा का बुधवार (25 मार्च) को अंतिम संस्कार हो गया। दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में आज सुबह 9.40 बजे छोटे भाई आशीष ने मुखाग्नि दी। इससे पहले, हरीश का पार्थिव शरीर श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा (62) ने बेटे हरीश को आखिरी बार प्रणाम किया।
पिता ने रोते हुए लोगों से हाथ जोड़कर कहा कि कोई रोना मत। बेटा शांति से जाए, इसलिए प्रार्थना कर रहा हूं। बेटा अब जहां जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।
ब्रह्मकुमारी रूपा ने कहा– यह समय परिवार के लिए आसान नहीं
ब्रह्मकुमारी रूपा ने कहा कि यह समय परिवार के लिए आसान नहीं है। ये परिवार हमसे 5-6 सालों से जुड़ा है। जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तो उनके पिता ने हम लोगों से कहा कि हरीश से मिलिए। इसके बाद हम लोग उनके घर गए। बाद में उन्हें प्यार से संकल्प दिलाया कि हे आत्मा, सबको माफ करो। किसी भी जन्म में आपके द्वारा कोई बुरा काम हुआ हो, जिससे दूसरों को दुख पहुंचा हो, तो माफी मांगते हुए इस देह रूपी पिंजड़े को छोड़कर उड़ जाओ और एक सुंदर शरीर धारण करो।
छह लोगों को मिलेगा नया जीवन
31 साल के हरीश ने कल यानी 24 मार्च को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली थी। वे 13 साल से कोमा में थे। डॉक्टर्स के मुताबिक, परिवार ने हरीश के फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किया है। इससे 6 लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। हरीश को एम्स में पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इसका मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। यह देश का पहला मामला है, जिसमें किसी को इच्छामृत्यु दी गई थी। हरीश को 14 मार्च को गाजियाबाद वाले घर से दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया। 16 मार्च को हरीश की फीडिंग ट्यूब (खाने की नली) हटा दी थी।

