Gautam Adani News: अमेरिका की कोर्ट ने सोमवार को गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले को खारिज कर दिया। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की केस खत्म करने की मांग मंजूरी दी।
गौतम अडाणी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट विकसित करने का ठेका मिल सके। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया था।
अडाणी ने जताई खुशी
अदालत का फैसला आने के बाद गौतम अडाणी ने X पर पोस्ट कर कहा, “मैं न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं।”
अमेरिका में अडाणी पर चल रहा पूरा मामला क्या था?
सोलर कॉन्ट्रैक्ट के लिए रिश्वत का आरोप
अमेरिकी अभियोजन के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच गौतम अडाणी, सागर अडाणी और विनीत एस. जैन पर भारत में सोलर एनर्जी के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा यानी करीब ₹2,100 करोड़ की रिश्वत देने की योजना बनाने का आरोप लगा।
2 अरब डॉलर मुनाफा कमाने के आरोप
जिन सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट के लिए कथित रिश्वत की योजना बनाई गई, उनसे करीब 20 साल में 2 अरब डॉलर यानी करीब ₹16,800 करोड़ से ज्यादा मुनाफा होने का अनुमान था।
जांच में रुकावट का भी आरोप
सिरिल कैबेनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रुपेश अग्रवाल पर ग्रैंड ज्यूरी, एफबीआई और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेज कमीशन (एसईसी) की जांच में रुकावट डालने की साजिश का आरोप था। अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर ईमेल और इलेक्ट्रॉनिक संदेश जैसे रिकॉर्ड हटाने और जांच अधिकारियों के सामने अपनी भूमिका से इनकार करने की कोशिश की।
अडाणी ने किसी समझौते की जानकारी से इनकार किया
मामले में एक और विवाद गौतम अडाणी के अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश के वादे को लेकर रहा। अडाणी ने 15 जुलाई को अदालत में दिए एफिडेविट में कहा था कि उन्हें ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है। उन्होंने माना कि वह पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा कर चुके हैं।
अडाणी ने बताया कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग के साथ बैठकों में कहा था कि यह निवेश वादा इन मामलों के समाधान का हिस्सा हो सकता है। जज गारौफिस ने कहा कि वह इस बात पर कोई राय नहीं दे रहे हैं कि रिश्वत के मामले को खत्म करने के लिए इस तरह के वित्तीय प्रस्ताव उचित थे या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्तावों का कानून के समान और निष्पक्ष तरीके से लागू होने पर क्या असर पड़ता है, इसका फैसला जनता को करना है।
न्याय विभाग पहले ही केस बंद करने को कहा चुका
18 मई को अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, केस को कानूनी तौर पर खत्म करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी थी। इसलिए अंतिम फैसला जज को करना था।
