Pakistan India Indus Water Treaty Controversy: सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को धमकाया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो हम उन हाथों को काट देंगे। उन्होंने दावा किया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकना चाहता है।
मुसादिक मलिक ने सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में एक नल है। वे कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। जो हमारे हिस्से के पानी पर दावा करेंगे, उनके हाथ काट दिए जाएंगे। वहीं, अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है। भारत इसे न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न रद्द कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है।
🚨 Water Gone. Threats On.
"Touch Our Water, We'll Cut Off Your Hand": Pakistan Minister Musadik Malik.
Arre bhai, koi inko batao… pichhle 1.5 saal se paani hi band hai
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— OsintTV 📺 (@OsintTV) June 29, 2026
सिंधु जल संधि पर सेमिनार करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तानी मंत्रियों ने बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार किया जाएगा। इसमें कानूनी एक्सपर्ट, जल एक्सपर्ट्स और विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी।
डॉन के अनुसार, तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी साफ कर चुके हैं कि पानी हमारी जीवनरेखा है और यह हमारी रेड लाइन भी है।
सिंधु जल संधि स्थगित होने से पाकिस्तान में जल संकट
- सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में गंभीर जल संकट है।
- देश की करीब एक-तिहाई आबादी प्रभावित है।
- नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64% पानी की कमी है।
- राइस कैनाल में 38% और दादू कैनाल में 82% पानी की कमी है।
- सुक्कुर बैराज का जल स्तर लगातार घट रहा है।
- स्थानीय नेताओं का आरोप है कि पानी के बंटवारे को लेकर सरकार की नाकामी से किसानों और अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि सन् 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। इस समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का बंटवारा हुआ था। इसके तहत तीन पूर्वी नदियों का पानी भारत को मिला है, जबकि तीन पश्चिमी नदियों के पानी पर पाकिस्तान को हक मिला है। हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों पर सिंचाई और पनबिजली परियोजना बनाने का अधिकार मिला हुआ है। खास बात रही है कि अप्रैल 2025 के पहले पाकिस्तान से साथ तीन युद्धों के दौरान भी भारत ने इस समझौते पर रोक नहीं लगाई थी और यह पानी के बंटवारे को तय करता रहा है।

