वो चुनाव में मुझे अंदर रखना चाहते हैं, ऐसे तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा: आजम खान

वो चुनाव में मुझे अंदर रखना चाहते हैं, ऐसे तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा: आजम खान

UP News: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की जमानत याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने गुरुवार को उनकी याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी। आजम ने कहा- मैं हर मामले का सामना करूंगा, लेकिन मुझे जमानत चाहिए। मैं 80 साल का हूं। मुझे ईडी के अलावा 28 अन्य मामलों में गिरफ्तार किया गया। ऐसे तो मेरी मौत जेल में ही हो जाएगी।

सपा नेता ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्‍होंने कहा- जिस समय मुझे रिहा किया जा रहा था, ठीक उसी समय ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। वे बस यही चाहते हैं कि चुनाव के दौरान मैं जेल के अंदर ही रहूं। आजम खुद सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए थे। उन्होंने ये बातें अपने वकील कपिल सिब्बल के जरिए कोर्ट से कहीं।

16 नंवबर को अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह इस मामले को 16 नवंबर से पहले एक डिविजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें। बेंच 16 नवंबर को ही आजम की याचिका पर अंतरिम आदेश पास करे।

31 अक्टूबर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आजम को रामपुर जेल से निकलते ही गेट पर गिरफ्तार कर लिया था। अगले दिन सुबह विशेष PMLA कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में गाजियाबाद की डासना जेल भेज दिया था।

सिब्बल बोले– बकरी–गाय को अपराध से अर्जित आय बताया गया

कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि ईडी की गिरफ्तारी गलत नीयत से की गई। मामला 2006 का है। FIR 2019 में फाइल हुई। PMLA कहां से आ गया? उन्होंने कहा- आरोपों को देखिए। एक लिस्ट है कि 2016 में आरोपी एक घर में घुसे और 5 हजार रुपए और एक तोला सोने की बालियां लूटकर ले गए और घर को बुलडोजर से गिरा दिया।

उन्‍होंने कहा- अगली शिकायत है कि उसी दिन आरोपी एक और घर में घुसे और परिवार को धमकाकर नकदी लूट ली। 4 बकरियां ले गए और घर गिरा दिया। बकरी और गाय को अपराध से अर्जित आय बता दिया गया। ये सब क्या हो रहा है?

CJI बोले– आपकी बात में दम हो सकता है

CJI सूर्यकांत ने सिब्बल से कहा- आपकी बात में दम हो सकता है, लेकिन हम कोई भी राय नहीं देना चाहते हैं।

ED ने किस मामले में आजम को पकड़ा है?

ED की कार्रवाई का संबंध मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े जौहर ट्रस्ट से है। एजेंसी सरकारी निर्माण कार्यों के धन और सामग्री के कथित दुरुपयोग, जमीन की खरीद और विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन के स्रोत की जांच कर रही है। ED के मुताबिक, इस मामले की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू हुई। एजेंसी ने अपनी जांच में आरोप लगाया कि सरकारी ठेकों से जुड़े धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में किया गया।

59 इमारतों के निर्माण और 114 बैनामों से हासिल जमीन की कीमत 499.09 करोड़ रुपए आंकी गई, जबकि वैध स्रोतों से 72.63 करोड़ रुपए का हिसाब मिला। बाकी 426.46 करोड़ रुपए को एजेंसी ने कथित अपराध की कमाई माना है। इसी आधार पर 28 अक्टूबर को ED ने यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों की करीब 426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की थी।

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