देश में अब मुसलमान गायों के लिए आंदोलन कर रहे, यही कलयुग है: कथावाचक देवकीनंदन

देश में अब मुसलमान गायों के लिए आंदोलन कर रहे, यही कलयुग है: कथावाचक देवकीनंदन

इन दिनों कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर गुजरात में कथा कह रहे हैं। कथा के बीच में ही उन्होंने कहा कि मेरा क्या होगा, हम सिर्फ इस चक्कर में रह जाते हैं। बाकी एक-एक करके हिंदू मिट रहा है। देश में 1 लीटर पेट्रोल-डीजल से भी सस्ती दो चीजें हैं, पहली- गाय की हत्या और दूसरी- हिंदुओं की जान।

देवकीनंदन ने कहा कि अभी गाजियाबाद में 15 साल के बच्चे को चाकू से गोद दिया। हिंदुओं को कोई भी आता है, मारकर चला जाता है। इसका जिम्मेदार हिंदू ही है। सिर्फ चुनाव के समय हम लोग कहते हैं कि बटेंगे तो कटेंगे। चुनाव के बाद सरकारों को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन न हो और हिंदू समाज सुरक्षित और संगठित रहे।

अब मुस्लिम भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग कर रहे

देवकीनंदन ठाकुर की सोमनाथ मंदिर परिसर में 29 मई से शुरू हुई कथा 04 जून तक चलेगी। रविवार को देवकीनंदन ने कहा कि वर्तमान में कुछ आश्चर्यजनक घटनाएं देखने को मिल रही हैं। अब तक हिंदू कहते थे कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो।

अब मुसलमान भाई लोग भी मस्जिदों से कह रहे हैं कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो। इसके लिए वो आंदोलन भी कर रहे हैं। जगह-जगह अनाउंस कर रहे हैं। सवाल यह है कि अब ऐसा करने से कौन रोक रहा है? हमको तो लगता है शायद यही कलयुग है।

व्यास पीठ से मुस्लिम समुदाय को दिया धन्यवाद

देवकीनंदन ठाकुर ने मुसलमानों को धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि हमारी व्यासपीठ से पहली बार उन मुस्लिम भाइयों को धन्यवाद दिया जा रहा है, जिन्होंने गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग खुलकर रखी है।

इस पहल को उन्होंने हिंदू भावनाओं के प्रति एक सकारात्मक कदम बताया। कहा कि ऐसे विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए। समाज में इस तरह की सोच को बढ़ावा मिलना चाहिए, जिससे एकता और सद्भाव मजबूत हो। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की दिशा में सभी को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।

पहले भी सनातन बोर्ड की उठाई थी मांग

महाकुंभ के समय देश में सनातन बोर्ड के लिए आवाज उठाकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर सुर्खियों में आए थे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की बात करके, धर्म संसद करके उन्होंने संतों का समर्थन जुटाया था। उन्होंने कहा था कि वक्फ बोर्ड की तरह जमीन हथियाने के लिए नहीं, हम मंदिरों को बचाने के लिए सनातन बोर्ड चाहते हैं। हम अपने मंदिर भी नहीं बचा सकते। क्या देश में मुगलों का शासन है?

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