Indian Railways: भारतीय रेलवे सफर का तरीका पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और तेज रफ्तार देने के लिए चालू वित्त वर्ष में 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से करीब 27 नई सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनें तैयार की जा रही हैं। देश की तीनों प्रमुख कोच फैक्ट्रियों में इन ट्रेनों का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। फिलहाल देश भर में चेयरकार और स्लीपर मिलाकर 100 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें दौड़ रही हैं, पर यह वित्त वर्ष वंदे भारत के उत्पादन के लिहाज से सबसे बड़ा साबित होने जा रहा है।
स्लीपर और चेयरकार का मिला–जुला रूप
सूत्रों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में 27 ट्रेन सेट का निर्माण पूरा होगा, जिसकी संख्या मांग के आधार पर बढ़ सकती है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री और कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री में इनका निर्माण जारी है। भारतीय रेलवे ने लंबी अवधि के लिए 1,000 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसमें 8, 16 और 24 कोच वाले अलग-अलग ट्रेन सेट (चेयरकार और स्लीपर) शामिल होंगे। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए 35,000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। इन ट्रेनों को जल्द ही अलग-अलग रूट पर शुरू किया जाएगा।
स्वदेशी बुलेट ट्रेन भी जल्द
वंदे भारत के बाद रेलवे अब आगे की सोच रहा है। आईसीएफ चेन्नई और बीईएमएल मिलकर 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली पूरी तरह स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन का निर्माण कर रहे हैं। शुरुआती योजना के अनुसार, इस स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन को देश में बन रहे बुलेट ट्रेन (हाइपर-स्पीड) ट्रैक पर चलाया जा सकता है, जिससे भारत रेल निर्माण क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा।
