दुनिया के लिए खुशखबरी: अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, फिर खुलेगा होर्मुज

दुनिया के लिए खुशखबरी: अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, फिर खुलेगा होर्मुज

Iran US War Update: ईरान और अमेरिका रविवार (14 जून) को जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर राजी हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। वहीं, ईरान ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के साथ कई महीनों तक चली लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक डील यानी MoU को अंतिम रूप दे दिया है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा।

राष्‍ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’ वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश पीस डील पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाई लेवल की बैठक होगी।

ईरान ने दस्तखत करने से पहले 3 शर्तें रखीं

ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है। हालांकि, ईरानी मीडिया के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में कुछ अहम बातें शामिल हैं। इनमें युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अगले 60 दिनों की बातचीत का ढांचा तय करना शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं। गरीबाबादी के मुताबिक, अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना।

दुनिया के लिए खुशखबरी: अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, फिर खुलेगा होर्मुज

पजशकियान बोले- देश के लिए काम करने वालों को गद्दार कहना गलत

अमेरिका के साथ पीस डील को लेकर ईरान में कट्टरपंथी धड़ा आलोचना कर रहा है। इसे लेकर राष्ट्रपति मसदू पजशकियान ने एक्स पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा- यह अफसोस की बात है कि देश के लिए काम कर रहे लोगों को गद्दार कहा जा रहा है। आलोचना करना लोगों का अधिकार है, लेकिन जो लोग कानून के तहत देश के हित में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें बदनाम करना सही नहीं है।

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