SC on CJP Protest: देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (15 अक्टूबर) को CJP प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट बंद करने और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- हम 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्र को नोटिस जारी कर रहे हैं। उन्हें इसका जवाब देना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले पर भी सरकार को नोटिस दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को CJP प्रदर्शन पर कहा कि उस दिन के सभी CCTV फुटेज संभालकर रखे जाएं। इससे पहले केंद्र सरकार ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में इंटरनेट बंद करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी।
गृह सचिव ने कोर्ट में दिया हलफनामा
गृह सचिव गोविंद मोहन ने कोर्ट को दिए हलफनामे में कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाह रोकने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की तरफ से कोर्ट में गोपाल शंकरनारायणन, कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने दलीलें रखीं। वहीं, सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गौरव भाटिया रख रहे हैं।
पत्रकारों के फोन जब्त करने पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस
सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पत्रकारों के उपकरण (फोन/कैमरा आदि) जब्त कर लिए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका काम इन्हीं पर निर्भर है, इसलिए ये उपकरण लौटाए जाने चाहिए।
हालांकि, SG तुषार मेहता ने कहा कि कोई भी उपकरण जब्त नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा– महिला पत्रकार को गिरफ्तार न करें
एसीपी विवेक भगत द्वारा एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज कराई गई FIR का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। CJI सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। SG तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अगर वह जांच में शामिल होती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
सरकार ने पूछा– क्या फोन रखने वाला हर कोई पत्रकार बन सकता है?
3 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया गया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने वकील इंदिरा जयसिंह से कहा कि तकनीक के इस दौर में, मोबाइल रखने वाला कोई भी व्यक्ति पत्रकार बन जाता है।
SG मेहता ने कहा कि कई लोग माइक लेकर घूमते हैं, रिकॉर्डिंग करने का दावा करते हैं और बाद में उन वीडियो को रील बनाकर अपलोड कर देते हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि एक रील बनाने वाले और एक स्वतंत्र (फ्रीलांस) पत्रकार के बीच फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है।
