Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार बढ़ती डॉलर की मांग और वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया, जिससे यह 92.00 प्रति डॉलर के ऑल-टाइम लो तक फिसल गया।
गिरावट के कारण
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रुपये में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में व्यापक मजबूती और एशियाई मुद्राओं में कमजोरी मानी जा रही है।
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वैश्विक बाजारों में डॉलर की तेजी के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है, जिसका असर भारतीय रुपये पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
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फॉरेक्स बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को तटस्थ रखने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई, जिससे रुपये में गिरावट तेज हुई।
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इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है।
इस साल कितना कमजोर हुआ रुपया?
इस साल अब तक रुपया करीब 2% कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के माल निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से रुपया लगभग 5% तक गिर चुका है। इंटरबैंक बाजार में रुपया 91.95 पर खुला और गिरकर 92.00 तक पहुंच गया। यह अपने पिछले बंद स्तर से 1 पैसा कमजोर रहा। बुधवार को रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 पर बंद हुआ था, जो उसका अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है। इससे पहले 23 जनवरी को रुपया इंट्रा-डे कारोबार में भी 92.00 के स्तर तक पहुंच गया था।

