UP News: सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के आर्थिक और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) की तर्ज पर अब ‘काशी-विंध्य क्षेत्र’ (Kashi-Vindhya Region-KVR) का गठन किया जाएगा। इस विशेष जोन के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश के सात प्रमुख जिलों में एकीकृत और सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जाएगा।
काशी-विंध्य क्षेत्र प्राधिकरण का कुल क्षेत्रफल 23,815 वर्ग किलोमीटर होगा, जिसमें वाराणसी और विंध्याचल मंडल के निम्नलिखित जिले शामिल हैं।
वाराणसी मंडल: वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली।
विंध्याचल मंडल: मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र।
इसमें सबसे बड़ा क्षेत्रफल सोनभद्र (6,788 वर्ग किमी) का है, जबकि सबसे छोटा जिला भदोही (1,015 वर्ग किमी) है। इस क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 2 करोड़ है।
केवीआर (KVR) की कार्यप्रणाली और लाभ
- इस प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे। प्रमुख सचिव (आवास) इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्य करेंगे।
- पूरे क्षेत्र के विकास का मास्टर प्लान KVR स्तर पर ही तैयार और मंजूर किया जाएगा। अब छोटी-छोटी स्वीकृतियों के लिए शासन (लखनऊ) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- नीति आयोग के सुझावों के आधार पर इस क्षेत्र को एक बड़े इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे।
- इन जिलों में परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी बुनियादी ढांचे का स्तर वैश्विक मानकों (Global Standards) के अनुरूप बढ़ाया जाएगा।
नीति आयोग का विजन
सरकार का मानना है कि KVR के गठन से राजकीय खजाने पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सतत विकास (Sustainable Development) का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। अगले एक-दो दिनों में इसके गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

