वो दिन दूर नहीं, जब देश नक्सलवाद, माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा: PM Modi

Constitution Day: संविधान की शक्ति ने साधारण व्यक्ति को पीएम पद तक पहुंचाया, पीएम मोदी ने लिखी देशवासियों को चिट्ठी

PM Modi News: वो दिन दूर नहीं, जब देश नक्सलवाद से, माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। इस बार माओवादी आतंक से मुक्त क्षेत्रों में दिवाली की रौनक कुछ और होने जा रही है। 50-55 साल हुए दिवाली नहीं देखी थी उन्होंने। अब दिवाली देखेंगे और मुझे पक्का विश्वास है हमारी मेहनत रंग लाएगी। वहां भी इस बार खुशियों के दीए जलेंगे। ये मोदी की गारंटी है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, मैं आपके सामने एक ऐसा विषय उठाना चाहता हूं जो देश की सुरक्षा के हिसाब से तो बड़ा है ही, हमारे नौजवानों के भविष्य से भी जुड़ा है। ये विषय नक्सलवाद का है। कांग्रेस के शासन में अर्बन नक्सलों का इकोसिस्टम इस कदर हावी था, और आज भी है, कि माओवादी आतंक की घटनाओं को लोगों तक न पहुंचने देने के लिए सेंसरशिप चलाता रहता है। कांग्रेस के शासन में अर्बन नक्सली माओवादी आतंकवाद पर कोई चर्चा नहीं होने देते थे। इसे नक्सलवाद नाम यूं ही दे दिया गया था, हकीकत में ये माओवादी आतंक था।

पीएम मोदी ने कही ये बात

कांग्रेस के इकोसिस्टम की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, तब देश में आतंकवाद की इतनी चर्चा होती थी। अनुच्छेद 370 पर बहस होती थी। लेकिन अर्बन नक्सली, जो ऐसी संस्थानों पर कब्जा करके बैठे थे, माओवादी आतंक पर पर्दा डालने का काम करते थे। देश को अंधेरे में रखते थे। पीएम ने कहा, 11 वर्ष पहले तक देश के सवा सौ जिले, 125 से ज्यादा, माओवादी आतंक से प्रभावित थे और आज ये संख्या सिर्फ 11 जिलों तक सिमट गई है। उस 11 में भी अब सिर्फ तीन जिले ही ऐसे बचे हैं, जो सबसे अधिक नक्सल प्रभावित हैं। सिर्फ पिछले 75 घंटों में 303 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। एक जमाने में जिनका 303 (गोली) चलता था, आज वो 303 सरेंडर हुए हैं। और ये कोई सामान्य नक्सली नहीं हैं, ये वो हैं जिनमें से किसी पर एक करोड़, किसी पर 25 लाख तो किसी पर 5 लाख का इनाम था।

पीएम मोदी ने कहा, नक्सली हिंसा के कारण मैं बेचैनी महसूस करता था, जबान पे ताला लगा के बैठा था, आज पहली बार मेरे दर्द को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। मैं उन माताओं को जानता हूं जिन्होंने अपने लाल खोए हैं। उन माताओं की अपने लाल से कुछ अपेक्षाएं थी। या तो वो ये माओवादी आतंकियों के झूठे बातों में फंस गए या तो माओवादी आतंक का शिकार हो गए। इसलिए, 2014 के बाद हमारी सरकार ने पूरी संवेदनशीलता के साथ भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया।

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