Petrol Diesel Crisis: देश में पेट्रोल और डीजल को लेकर मचे हाहाकार के बीच केंद्र सरकार ने दोनों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती की है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पेट्रोल पर ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म यानी जीरो कर दी गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
इजराइल-ईरान जंग के कारण क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ती और आम आदमी पर बोझ बढ़ता। ऐसे में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा है।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे?
इसकी संभावना कम है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेगी।
मोदी ईरान जंग पर आज मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (27 मार्च) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे। इसमें ईरान जंग के बाद बिगड़े हालात पर चर्चा संभव है। चुनावी राज्यों के सीएम इसमें शामिल नहीं होंगे। मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा में कहा था कि ईरान जंग जारी रही तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। आने वाला समय कोरोना काल जैसी परीक्षा वाला होगा। केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।
वहीं, सरकार ने आज देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि दुनिया में कुछ भी हो जाए, भारत के पास 60 दिन का पेट्रोल-डीजल है।
नॉलेज बॉक्स: इनडायरेक्ट टैक्स है एक्साइज ड्यूटी
यह एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है, जो देश के भीतर मैन्युफैक्चर होने वाले सामान पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में, जब कच्चा तेल रिफाइनरी से साफ होकर बाहर निकलता है, तब केंद्र सरकार उस पर प्रति लीटर के हिसाब से फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी वसूलती है।
चूंकि एक्साइज ड्यूटी फिक्स होती है, इसलिए सरकार इसमें कटौती करके आम जनता को राहत दे सकती है या इसे बढ़ाकर अपना रेवेन्यू बढ़ाती है। मौजूदा कटौती से सरकार का राजस्व कम होगा, लेकिन तेल कंपनियों को घाटा कम करने में मदद मिलेगी।

