Technology: भारत ने तोड़ा अमेरिकी एकाधिकार: पहली बार देश में बना GaN चिप

Technology: भारत ने तोड़ा अमेरिकी एकाधिकार: पहली बार देश में बना GaN चिप

Technology in India: भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की वैज्ञानिक मीना मिश्रा के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने देश में पहली बार स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) सेमीकंडक्टर चिप विकसित करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर है, जो देश की रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करती है।

क्या है GaN तकनीक?

गैलियम नाइट्राइड (GaN) एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर सामग्री है जिसे इसकी उच्च शक्ति क्षमता, तापीय स्थिरता और बेहतर प्रदर्शन के कारण वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की तुलना में GaN चिप्स अधिक शक्तिशाली, ऊर्जा-कुशल और विभिन्न कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन देने में सक्षम हैं। इस तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से रडार सिस्टम, मिसाइल ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में किया जाता है। इसके अलावा, 5G नेटवर्क, उच्च आवृत्ति संचार प्रणालियों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

अमेरिकी एकाधिकार का अंत

अब तक केवल अमेरिका के पास ही उच्च-शक्ति वाले GaN सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की तकनीक उपलब्ध थी। भारतीय वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि ने न केवल इस एकाधिकार को तोड़ा है, बल्कि भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है जो इस अत्याधुनिक तकनीक में महारत रखते हैं। DRDO की इस सफलता का परिणाम वर्षों की कड़ी मेहनत, निरंतर परीक्षण और उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण प्रक्रियाओं का है। इस स्वदेशी चिप के विकास से भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और रक्षा प्रणालियों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

रक्षा और रणनीतिक महत्व

यह तकनीकी सफलता ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की दिशा में एक बड़ा कदम है। GaN चिप तकनीक भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में भारत के रक्षा उत्पादन को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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