नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग यानी DoT ने WhatsApp, Signal, Telegram जैसे सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को राहत देते हुए सिम बाइंडिंग की डेडलाइन को बढ़ा दी है। हाल ही में सरकार ने डिजिटल फ्रॉड और आइडेंटिटी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सिम बाइंडिंग अनिवार्य करने के लिए कहा था। इस नियम को पिछले साल नवंबर 2025 में नोटिफाई किया गया था, जिसे सोशल मीडिया कंपनियों को अगले 90 दिनों में लागू करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार ने अब इसकी डेडलाइन को बढ़ा दी है।
2026 के अंत तक होगा लागू
रिपोर्ट के मुताबिक, दूरसंचार विभाग ने इस नियम को अब 2026 के अंत तक लागू करने की डेडलाइन दी है। सिम बाइंडिंग का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग, डेटिंग ऐप्स आदि यूजर्स की पहचान के लिए उसके मोबाइल नंबर और सिम के जरिए करे। जिस तरह बैंकिंग और UPI ऐप्स उसी डिवाइस में काम करते हैं, जिसमें उस मोबाइल नंबर का सिम लगा होता है, उसी तरह सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को भी वेरिफिकेशन करना होगा।
क्यों बढ़ाई गई डेडलाइन?
Meta, Telegram, Signal जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने दूरसंचार विभाग को बताया कि इसे लागू करने में कई तरह की तकनीकी दिक्कतें हैं, जिसकी वजह से इसे फुली ऑपरेशनल करने में समय लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के आग्रह पर इसे लागू करने की समय-सीमा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने DoT को बताया कि इस फीचर को लागू करना आसान नहीं है। इसके लिए मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में भी तकनीकी बदलाव करने की जरूरत होगी। ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां Apple और Google ने भी दूरसंचार विभाग को ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव को लेकर डेडलाइन एक्सटेंड करने के लिए कहा था। इस फीचर को लागू करने से पहले इसकी पूरी तरह से टेस्टिंग जरूरी है, जिसके लिए और वक्त चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कर रहे टेस्टिंग
Meta, Snapchat, Telegram जैसी कंपनियां सिम बाइंडिंग फीचर को इनेबल करने के लिए DoT के साथ मिलकर काम कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सऐप इस फीचर पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें ऐप यूजर से यह कंफर्म करेगा कि उसके मोबाइल नंबर का सिम कार्ड उसी फोन में मौजूद है, जिसमें उसने अकाउंट क्रिएट किया है या ऐप यूज किया जा रहा है। वॉट्सऐप का यह फीचर फिलहाल इंटरनल बीटा टेस्टिंग फेज में है और जल्द ही इसका पब्लिक बीटा वर्जन टेस्टिंग के लिए उपलब्ध हो सकता है।
इसी तरह मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां अपने OS के लिए इस फीचर से जुड़ा पैच जारी कर सकती हैं, जिसके बाद वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स यूजर से यह वेरिफाई कर पाएंगे कि वो जिस मोबाइल नंबर से अकाउंट यूज कर रहा है, वो सिम उसी डिवाइस में लगा हुआ है।

