Mehbooba Mufti: ‘कश्मीर का गुस्सा लाल किले पर दिख रहा’, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बयान

Mehbooba Mufti: ‘कश्मीर का गुस्सा लाल किले पर दिख रहा', पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बयान

Mehbooba Mufti: पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा लाल किला विस्फोट को कश्मीर में अशांति से जोड़ने के बाद एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया। भाजपा ने महबूबा मुफ्ती के इस बयान की आलोचना की है। गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में लाल किले के पास विस्फोट का मामला देश भर में बढ़ती असुरक्षा की भावना और जम्मू-कश्मीर में केंद्र की नीतियों की विफलता को दर्शाता है। हालांकि, भाजपा ने मुफ्ती के बयानों की कड़ी निंदा की और उन पर हमले के पीछे के लोगों के लिए बहाने बनाने का आरोप लगाया। एक्स पर एक पोस्ट में, पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि वह चरमपंथियों को सही ठहराने की कोशिश कर रही हैं।

भाजपा ने मुफ्ती पर साधा निशाना

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा। प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा, आतंकवादी बुरहान वानी का समर्थन करने वाली मुफ़्ती अब लाल किला विस्फोट के आतंकवादियों को सही ठहरा रही हैं। कहती हैं- आतंकवाद के लिए हिंदू-मुस्लिम और नफरत जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा, कांग्रेस के नेतृत्व वाला भारतीय विपक्ष आतंकवादियों का समर्थन करने से क्यों नहीं हिचकिचाता?

लाल किला विस्फोट पर महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा

बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने कहा, “आपने (केंद्र सरकार) दुनिया को बताया कि कश्मीर में सब कुछ ठीक है, लेकिन कश्मीर की परेशानियां लाल किले के सामने गूंज रही हैं। आपने जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित बनाने का वादा किया था, लेकिन उस वादे को पूरा करने के बजाय, आपकी नीतियों ने दिल्ली को असुरक्षित बना दिया है। मुझे नहीं पता कि केंद्र सरकार में कितने लोग सच्चे राष्ट्रवादी हैं। अगर एक पढ़ा-लिखा युवा, एक डॉक्टर, अपने शरीर पर आरडीएक्स बांधकर खुद को और दूसरों को मार डालता है, तो इसका मतलब है कि देश में कोई सुरक्षा नहीं है। आप हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करके वोट तो पा सकते हैं, लेकिन देश किस दिशा में जा रहा है?”

महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि विभाजनकारी राजनीति राष्ट्रीय सुरक्षा पर हावी हो गई है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि दिल्ली के लोग इसे समझते हैं या नहीं, या वे सोचते हैं कि जितना ज़्यादा हिंदू-मुस्लिम विभाजन होगा, उतना ही ज़्यादा खून-खराबा होगा, देश में जितना ज़्यादा ध्रुवीकरण होगा, उतने ही ज़्यादा वोट उन्हें मिलेंगे? मुझे लगता है कि उन्हें दोबारा सोचना चाहिए। देश कुर्सी से कहीं बड़ा है।” उन्होंने कहा कि “कहीं न कहीं, जहरीला माहौल भी कश्मीर के युवाओं को खतरनाक रास्ते पर जाने के लिए जिम्मेदार है।”

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