Indore Water Outbreak Crisis: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर सभी वार्डों में कांग्रेस मंगलवार को प्रदर्शन कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी प्रदर्शन में मौजूद हैं। जहरीले पानी से जीवन लाल और गीता बाई की मौत के बाद मंगलवार को इनके घर उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेसी पहुंचे। जब वे परिजनों से मिलने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान सिंघार और पुलिस के बीच बहस भी हुई।
इसके बाद कांग्रेस नेता मृतक अशोक लाल पवार के घर पहुंचे हैं। यहां जीतू पटवारी ने कहा कि देश-विदेश में स्वच्छता के नाम पर पहचान बनाने वाले इंदौर की छवि इस मामले से धूमिल हुई है। पटवारी ने दावा किया कि यहां 15-17 नहीं, बल्कि कई लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि वे क्या कर रहे हैं। पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की।
यह राजनीति का विषय नहीं, जनता से जुड़ा गंभीर मामला है: पटवारी
जीतू पटवारी ने यह भी पूछा कि इंदौर के सांसद क्या कर रहे हैं और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर कुछ कहें, सामने आएं। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता से जुड़ा गंभीर मामला है। अंत में पटवारी ने सभी लोगों से अपील की कि वे सच्चाई का साथ दें और इस मुद्दे को गंभीरता से लें।
डरी हुई सरकार को सच से डर है,
इसीलिए विपक्ष को रोकना चाह रही है!
📍भागीरथपुरा (इंदौर) pic.twitter.com/J5AnY8NvOs— MP Congress (@INCMP) January 6, 2026
वहीं, मामले में आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन अब दूषित पेयजल की वजह से यह पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने कहा कि पीने का पानी ही अगर दूषित हो तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। हम इस मामले में मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं, क्योंकि यह समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है।
15 जनवरी को होगी अगली सुनवाई | Indore Water Outbreak Crisis
दरअसल, पूरे इंदौर शहर का पीने का पानी सुरक्षित नहीं है। खास बात यह की कोर्ट ने अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को वर्चुअली हाजिर होने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
बता दें कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।
याचिकाकर्ता बोले– सप्लाई हो रहा पानी दूषित
31 दिसंबर, 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को यह निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य।
अन्य याचिकाओं में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि इस घटना से पहले ही स्थानीय निवासियों की ओर से कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई संज्ञान नहीं लिया। अगर समय रहते इन शिकायतों पर संज्ञान लिया गया होता और उचित रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो यह घटना ही नहीं होती। सीनियर काउंसिल ने यह भी कोर्ट को बताया कि 2022 में महापौर द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम अब तक नहीं हो पाया।
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर एक्शन नहीं लिया | Indore Water Outbreak Crisis
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि साल 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग इलाकों से पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने यह भी तर्क रखा कि इस मामले में संबंधित अधिकारी केवल नागरिक (सिविल) जिम्मेदारी के ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।
हाईकोर्ट बोला– एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े मुद्दों को 7 श्रेणियों में बांटा
- प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश।
- रोकथाम और सुधारात्मक उपाय।
- जिम्मेदारी तय करना।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई।
- मुआवजा।
- स्थानीय निकायों को निर्देश।
- जन-जागरूकता और पारदर्शिता।

