Donald Trump on India Russia Oil: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। गुरुवार (16 अक्टूबर) को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे दोस्त हैं। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। भारत के रूस से तेल खरीदने से मुझे खुशी नहीं थी, लेकिन आज उन्होंने (पीएम मोदी) मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा।
दरअसल, अमेरिका अगस्त 2025 में भारत पर रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा चुका है। इससे पहले उसने 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ लगाया था। इससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक रूसी तेल खरीद को रोकने या कम करने जैसी किसी टिप्पणी की पुष्टि नहीं की है।
ट्रंप बोले- मोदी मुझसे प्यार करते हैं | Donald Trump on India Russia Oil
डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह भी कहा कि हाल में भारत में अमेरिकी राजदूत बनने जा रहे सर्जियो गोर और पीएम मोदी की मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग के बाद सर्जियो ने मुझे बताया कि, वे (मोदी) ट्रम्प से प्यार करते हैं, हालांकि मैं चाहूंगा कि यहां प्यार शब्द का गलत मतलब न निकालें, मैं किसी का पॉलिटिकल करियर खराब नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि मैंने सालों से भारत को देखा है, वहां हर साल सरकार बदल जाती है। मेरे दोस्त (मोदी) लंबे समय से वहां पर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि वे इसे तुरंत रोक नहीं सकते, लेकिन इसका एक प्रोसेस है जिसे जल्द पूरा किया जाएगा।
भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना | Donald Trump on India Russia Oil
अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है। ट्रंप प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है। रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट के मुताबिक इसका मकसद रूस पर सेकेंडरी प्रेशर डालना है, जिससे वह युद्ध खत्म करने पर मजबूर हो सके।

