CJI Surya Kant: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गोपनीयता और स्वतंत्र निर्णय की चिंता के कारण एआई से दूरी बनाना सही नहीं है। बल्कि इसे सही नियमों के तहत इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि तकनीक को रोकना नहीं, बल्कि नियंत्रित करना ही बेहतर रास्ता है। सीजेआई ने यह बात एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही, जिसका विषय था वैश्वीकरण के दौर में मध्यस्थता और तकनीक का उपयोग। उन्होंने कहा कि एआई के आने से मध्यस्थता की प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। खासकर उन मामलों में जहां दूरी और समय की समस्या होती है। लेकिन इसके साथ नई जिम्मेदारियां भी आई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सोच–समझकर करना चाहिए एआई का इस्तेमाल
सीजेआई ने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल से गोपनीयता और स्वतंत्र फैसले को लेकर चिंता बढ़ी है। लोगों को भरोसा होना चाहिए कि फैसले इंसानी समझ और निष्पक्षता से लिए जा रहे हैं। इसलिए एआई का इस्तेमाल सोच-समझकर और सीमाओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक को पूरी तरह हटाना समाधान नहीं है। सही तरीका यह है कि इसके उपयोग के लिए एक मजबूत प्रक्रियात्मक ढांचा बनाया जाए। इससे तकनीक का फायदा भी मिलेगा और जोखिम भी कम होगा। सीजेआई ने जोर दिया कि एआई के इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के नियमों को भी मजबूत करना जरूरी है। समय के साथ इन प्रोटोकॉल को अपडेट करना होगा ताकि तकनीक के साथ संतुलन बना रहे।
मध्यस्थता में मजबूत सहयोगी बन सकता है एआई
उन्होंने कहा कि अगर सही सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं, तो एआई मध्यस्थता में एक मजबूत सहयोगी बन सकता है। इससे न सिर्फ काम तेजी से होगा, बल्कि प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी भी बनेगी। सीजेआई ने संकेत दिया कि आने वाले समय में तकनीक और कानून का मेल और मजबूत होगा। ऐसे में जरूरी है कि दोनों के बीच संतुलन बनाकर रखा जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

