Amit Shah Bills 2025 Update: अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए 4 बिल, ऑनलाइन गेमिंग पर लग सकता है बैन

Amit Shah Bills 2025 Update: अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए 4 बिल, ऑनलाइन गेमिंग पर लग सकता है बैन

Amit Shah Bills 2025 Update: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (20 अगस्‍त) को लोकसभा में इससे संबंधित तीन बिल पेश किए। इसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी ऐसे अपराध में गिरफ्तार या 30 दिन की हिरासत में रहता है, जिसकी सजा 5 साल या उससे ज्यादा हो तो उसे पद छोड़ना पड़ेगा। तीनों विधेयकों के खिलाफ लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ।

विपक्ष ने तीनों बिलों को वापस लेने की मांग की। विपक्ष ने गृह मंत्री के ऊपर कागज के गोले फेंके। कांग्रेस, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और सपा ने बिलों को न्याय विरोधी, संविधान विरोधी बताया। ओवैसी ने कहा कि यह सरकार देश को ‘पुलिस स्टेट’ बनाने पर तुली है। यह कदम चुनी हुई सरकार पर ‘मौत की कील’ साबित होगा। संविधान को बदला जा रहा ताकि भारत को पुलिस स्टेट में बदल सकें। इस पर अमित शाह ने बिलों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की बात कही।

ये हैं तीनों बिल | Amit Shah Bills 2025 Update

ये तीनों बिल अलग-अलग इसलिए लाए गए हैं, क्योंकि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित राज्यों के लीडर्स के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।

पहला बिल- 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 है, जो केंद्र और राज्य सरकारों पर लागू होगा।

दूसरा बिल- गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025 है, जो केंद्र शासित राज्यों के लिए है।

तीसरा बिल- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 है, जिसे जम्मू-कश्मीर पर लागू किया जाएगा।

गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025

केंद्र सरकार के अनुसार, अभी केंद्र शासित प्रदेशों में गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 (1963 का 20) के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है।

इसलिए, ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 की धारा 45 में संशोधन की आवश्यकता है।

130वां संविधान संशोधन बिल 2025

केंद्र ने इस बिल को लेकर बताया कि संविधान में किसी ऐसे मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है जिसे गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार किया गया हो और हिरासत में लिया गया हो। इसलिए ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री और राज्यों या नेशनल कैपिटल टेरिटरी दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री को हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन की जरूरत है।

बता दें कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने छह महीने और तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी ने 241 दिनों तक हिरासत और जेल में रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। केजरीवाल पद पर रहते गिरफ्तार होने वाले पहले CM थे।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 | Amit Shah Bills 2025 Update

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन के बाद गंभीर आपराधिक केस में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिन में हटाने का प्रावधान होगा।

ऑनलाइन गेमिंग पर बैन लगाने वाला बिल भी पेश

केंद्र सरकार ने लोकसभा में आज ऑनलाइन गेमिंग पर बैन लगाने वाला बिल ‘प्रोडक्शन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025’ भी पेश किया। कैबिनेट ने 19 अगस्त को ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दी। इसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग, विज्ञापन, खेल के लिए उकसाने वाले को सजा-जुर्माना या दोनों हो सकता है। तीन साल तक कैद या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

प्रोडक्शन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 | Amit Shah Bills 2025 Update

  • वैसे ऑनलाइन गेम जो पैसे के लिए खेले जाते हैं (जैसे- रियल मनी गेम्स, सट्टा, जुआ) पर पूरी तरह बैन लगेगा।
  • नियमों के उल्लंघन पर 3 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसे प्लेटफार्मों पर विज्ञापन देने पर दो साल तक की कैद या ₹50 लाख तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान होगा।
  • नेशनल ऑनलाइन गेमिंग कमीशन (NOGC) बनेगा, जो सभी ऑनलाइन गेम्स को रेगुलेट करेगा और लाइसेंस देगा।
  • जो गेम मनोरंजन, कौशल या सामाजिक उद्देश्यों के लिए होते हैं (जैसे ई-स्पोर्ट्स), उन्हें प्रमोट किया जाएगा।
  • बिल में उम्र वेरिफिकेशन, गेमिंग टाइम लिमिट, वित्तीय लेनदेन की निगरानी, और डेटा प्राइवेसी के प्रावधान शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *