BSP Mayawati: बसपा सुप्रीमो मायावती ने 7.8 फीसदी जीडीपी विकास दर के सरकारी दावे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से परेशान आम जनता इस बात को लेकर असमंजस में है कि सरकारी दावों पर भरोसा करे या जमीनी हकीकत पर। मायावती ने कहा कि यदि सरकार की ओर से पेश किए गए विकास दर के आंकड़े सही हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन अगर ये केवल आंकड़ों की बाजीगरी हैं तो चिंता का विषय है। सरकार को विश्वसनीय तरीके से बताना चाहिए कि इतनी ऊंची विकास दर का लाभ देश की करोड़ों गरीब और मेहनतकश जनता को कितना मिला है और आगे कितना मिलेगा।
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना…
— Mayawati (@Mayawati) September 4, 2026
बोलीं– जनता के जीवन में बदलाव से मापा जाए विकास
बसपा प्रमुख ने कहा कि विकास के आंकड़े और दावे अपनी जगह हैं, लेकिन उनकी असली कसौटी जमीनी हकीकत है। विकास वही सार्थक है, जिससे आम जनता के जीवन में समतामूलक बदलाव आए और लोग खुशहाल हों। उन्होंने कहा कि जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों का लाभ देश की करोड़ों मेहनतकश जनता तक पहुंचना और उसका असर लोगों को महसूस होना जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो करीब 140 करोड़ आबादी ‘धनवान सरकार की गरीब जनता’ होने का बोझ ढोती रहेगी। मायावती ने कहा कि देश का विकास तभी ‘अच्छे दिन’ वाला माना जाएगा, जब बहुजन और मेहनतकश जनता गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से मुक्त होकर आत्मसम्मान के साथ अपेक्षाकृत सुखी जीवन जी सके।
