Bhopal Farmers Protest: Gen-Z किसान आंदोलन! जानिए क्या हैं मांगे?

Bhopal Farmers Protest: Gen-Z किसान आंदोलन! जानिए क्या हैं मांगे?

Bhopal Farmers Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान क्रांति पैदल यात्रा भोपाल पहुंच गई है और अब आंदोलनकारी किसान भोपाल में मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने वाले हैं। किसानों की मांग है कि सरकार 100 फीसदी मूंग खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था को ठीक करे। बताया जा रहा है कि मंगलवार (27 जुलाई) की देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन यह मीटिंग किसी नतीजे तक नहीं पहुंची, जिसके बाद अब किसान सीएम आवास का घेराव करने जा रहे हैं। रात भर से धरने पर बैठे हुए हैं किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सारी मांगें नहीं मान ली जातीं, तब तक वह धरने पर ही बैठे रहेंगे और आंदोलन का रूप बड़ा होता जाएगा। आज सीएम आवास जाएंगे।

खुद बढ़वाई मूंग की खेती, अब खरीदने से मना कर रही सरकार

किसानों का दावा है कि वे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से आए हैं लेकिन उनसे भी नाराज हैं क्योंकि केंद्र और राज्य के एक दूसरे को जिम्मेदार बताने के खेल में किसान खून के आंसू रो रहा है। किसानों का दावा है कि मूंग के उत्पादन को सरकार ने बढ़वाया और अब खरीद करने से पीछे हट रही है। किसानों को 10-12 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है और किसान आंदोलन के लिए मजबूर हैं।

आंदोलन में आए जेनज़ी किसान

किसानों का कहना है कि इस बार आपको इस आंदोलन में कोई पगड़ी वाले किसान नहीं दिख रहे हैं। यह मोर्चा युवा और जेन-जी किसानों ने संभाल रखा है। उनका दावा है कि युवाओं की ताकत सरकार ने दिल्ली में देख ली है। जरूरत पड़ी तो भोपाल में भी दिखा देंगे। राजधानी भोपाल आने से पहले ये किसान पिछले 25 दिन से जिला मुख्यालयों में बैठे थे लेकिन स्थानीय प्रशासन और मंत्रियों ने बात को गंभीरता से नहीं लिया। अभी राजधानी में बैठे ज्यादातर किसान नर्मदापुरम और आसपास के 12 जिलों से आए हैं। ये किसान नर्मदा नदी के आसपास के ज्यादा हैं।

किसानों की 8 मांगें, दो प्रमुख

बताया जा रहा है कि किसान आठ मांगों पर अड़े हैं लेकिन सरकार से बातचीत के लिए 13 संगठनों के प्रतिनिधमंडल ने बताया कि दो प्रमुख मांगें हैं जिन्हें सरकार को मानना होगा। पहला- मूंग फसल की सौ प्रतिशत खरीदी की जाए और दूसरा- खाद वितरण में टोकन सिस्टम खत्म किया जाए।

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