Lucknow News: लखनऊ में बुधवार (11 मार्च) को 21वें रमजान का जुलूस निकाला जा रहा है। शिया समुदाय के लोग नम आंखों के साथ हजरत अली के ताबूत की जियारत कर रहे हैं। ईरान-इजराइल जंग के विरोध में जुलूस के रास्ते में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीरें सड़क पर चिपकाई गई हैं। जुलूस में शामिल अकीदतमंद ‘या अली मौला’ और ‘हैदर मौला’ के नारे लगाते हुए इन तस्वीरों को पैरों से रौंदते हुए गुजर रहे हैं।
इसके अलावा, नंगे पांव और काले कपड़े पहने महिला-पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों में ताबूत को छूने और चूमने की होड़ मची हुई है। जुलूस नजफ इमामबाड़ा, सआदतगंज से शुरू होकर कर्बला, तालकटोरा पर समाप्त होगा। इस दौरान हैदरगंज में परंपरा के मुताबिक कुएं के पास कुछ देर के लिए ताबूत को रोका जाएगा और उस पर काली चादर चढ़ाई जाएगी।
हजरत अली की शहादत में निकलता है जुलूस
शिया समुदाय का मानना है कि 19वीं रमजान को हजरत अली जब नमाज के लिए मस्जिद पहुंचे तो उनके ऊपर तलवार से हमला हुआ था। इसके बाद 21वें रमजान को हजरत अली शहीद हो गए थे। उसी घटना को याद करते हुए जुलूस निकाला जाता है।
ज्वाइंट सीपी बबलू कुमार पहुंचे
जुलूस में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और अलर्ट हो गया। ज्वाइंट सीपी बबलू कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने डीसीपी से स्थिति की जानकारी ली। पुलिस अफसरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।
10 एडिशनल एसपी और 30 डिप्टी एसपी तैनात
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि जुलूस लगभग 6 किलोमीटर लंबा है। हजारों लोग एक साथ चल रहे हैं। यह शिया समुदाय का बेहद महत्वपूर्ण जुलूस है। पुलिस की तरफ से सख्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। बाहर से फोर्स बुलवाई गई है। 10 एडिशनल एसपी और 30 डिप्टी एसपी तैनात किए गए हैं। 500 पुलिसकर्मी बाहर से लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 12 कंपनी पीएसी, 2 कंपनी RAF और CRPF तैनात है। 91 जगह पर रूफटॉप ड्यूटी लगी है, जहां छत के ऊपर से निगरानी हो रही है। 52 संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं । ड्रोन कैमरे से निगरानी हो रही है। महत्वपूर्ण चौराहों पर इंस्पेक्टर और एसीपी को तैनात को किया गया है। पुलिस डिपार्टमेंट के अलावा नगर निगम, लेसा, जिला प्रशासन के कर्मचारी भी तैनात हैं। सिविल डिफेंस के लोग भी सेवाएं दे रहे हैं।

