Mayawati: बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। उन्होंने दलितों समेत उपेक्षित वर्गों के मान-सम्मान के लिए अपनी जिंदगी समर्पित करने का दावा करते हुए कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगी, मेरा संघर्ष जारी रहेगा। मायावती ने खुद की सेहत सही होने और बसपा संस्थापक कांशीराम का एकमात्र उत्तराधिकारी होने का जिक्र करके साफ कर दिया पार्टी को कमजोर करने की साजिशों का वह मुकाबला करने में सक्षम हैं। साथ पार्टी में बीते दिनों गुटबाजी करने वाले कुछ पदाधिकारियों को भी उन्होंने सख्त संदेश दिया कि पार्टी की कमान उनके मजबूत हाथों में ही रहेगी। उन्होंने कहा कि मैं कभी झुकने वाली नहीं हूं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटूंगी। इस कार्य में पार्टी के लोग भी मुझे निराश नहीं करेंगे।
सपा का पीडीए देखता रह जाएगा
उन्होंने सपा के पीडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों का भी आरक्षण का लाभ सपा सरकार में इनका खुद का समाज ही उठाता रहा। मुस्लिम समाज भी उपेक्षित रहा है। भरोसा जताया कि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज का वोट इस बार पहले से कहीं ज्यादा बसपा को ही मिलेगा और सपा का पीडीए देखता रह जाएगा। जातियों को बसपा के साथ जोड़ने की उनकी यह कवायद क्या असर दिखाती है, इसका नतीजा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।

