लव जिहाद रोकने के लिए आदर्श उदाहरण राम हैं, रामकथा सुनने नहीं, समझने का विषय: CM Yogi

लव जिहाद रोकने के लिए आदर्श उदाहरण राम हैं, रामकथा सुनने नहीं, समझने का विषय: CM Yogi

UP News: सूबे के मुखिया योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को सीतापुर रोड स्थित ब्रज की रसोई परिसर में कहा कि प्रभु श्रीराम ने नारी गरिमा के लिए काम किया। यह आज के समय में लव जिहाद रोकने के लिए आदर्श उदाहरण है। राम जब पहली बार घर से निकले तो उन्हें सबसे पहले ताड़का मिली। वह रावण से प्रेरित थी। गलत को गलत ही मिलते हैं। मारीच और सुबाहु साधु-संतों को उनकी जगह से हटा रहे थे। वे लैंड जिहाद के उदाहरण हैं।

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं है। इसे सुनकर समझना होगा। मंगलवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा में पहुंचे। सीएम ने रामभद्राचार्य के लिए कहा कि वह 5 महीने के एकांतिक वास में जा रहे हैं। उसके बाद उनसे फिर मिलूंगा।

नकारात्मक ताकतें हमेशा रही हैं

सीएम योगी ने कहा कि याद करिए रावण का राज्य था। खर और दूषण पूरे दंडकारण्य में कब्जा जमाए थे। ताड़का बक्सर तक आ गई थी। ये सब मिलकर पूरा उजाड़ मचाए हुए थे। जब भी नकारात्मक ताकतें आती हैं तो उजाड़ ही करती हैं। नकारात्मक ताकतें हर कालखंड में आएंगी, लेकिन सज्जन शक्ति को इनका डटकर मुकाबला करना होगा। खर-दूषण और मारीच-सुबाहु क्या कर रहे थे? वो भी रावण के साथ लैंड जिहाद के अभियान में जुड़े हुए थे।

अगर आस्था नहीं, तो यह धरती धर्मशाला नहीं

सूबे के मुखिया ने कहा कि जो भारत के प्रति निष्ठा नहीं रखते, जिनकी भारत के प्रति आस्था नहीं है, भारत के संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, उन लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। इस संकल्प के साथ हम सब आगे बढ़ेंगे। संत शक्ति सबको एकजुट कर आगे ले जाना चाहती है।

कोई धर्म के नाम पर, कोई जाति के नाम पर बांटने का प्रयास करेगा। लेकिन, हम सबको कथा के उस मर्म को समझना पड़ेगा, जो यहां पर व्यासपीठ से जगद्गुरु ने समझाने का प्रयास किया। हमारे जो आदर्श हैं, उनके अनुसार जीवन जीने का प्रयास करें। हम शिव और राम की पूजा करते हैं तो अपना जीवन उनके आदर्श पर जीएं।

जिसने राम का द्रोह किया, वह मिट गया

योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि जिसने भी राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। जिसने राम का द्रोह किया, उसको इस धरती पर कोई जगह नहीं मिली। हम सब इस बात को ध्यान रखें। इसके अनेक उदाहरण हैं।

मारीच, रावण उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेते हैं और पशुवत मारे जाते हैं। क्योंकि राम के साथ द्रोह करते हैं। …और हमारे पवनसुत हनुमानजी हैं, विभीषण हैं… इनको भले ही जन्म के समय सामान्य जीवन मिला। लेकिन, राम की संगत का असर हुआ कि ये पूज्य हो गए। हम सुबह जो 7 नाम लेते हैं, उनमें विभीषण का भी नाम है। हमारे यहां हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा है।

शायद ही कोई भारतीय हो, जो श्रीराम को न मानता हो

सीएम योगी ने कहा, रामजन्मभूमि के लिए सभी पूज्य संतों ने अपने जन्म-मरण का विषय बना दिया था। पूज्य संतों ने इसलिए नहीं किया था कि उन्हें कुछ लाभ मिले। उन्होंने श्रीराम के लिए किया। शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो, जिसके डीएनए में भारत है, वह श्रीराम को न मानता हो। एक नाम उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक जोड़ सकता था। एक लंबे समय तक उनके लिए आंदोलन चला। 491 वर्षों तक रामजन्मभूमि के लिए किसी न किसी रूप में चलता रहा।

जो काम तुलसीदास ने किया, वही रामभद्राचार्य कर रहे

मध्यकाल में तुलसीदास ने जनचेतना जागृत की, समाज को एकजुट होने की, विदेशी आक्रांतों के सामने आने की, प्रभु राम के प्रति भक्ति का संदेश देकर पूरे उत्तर भारत को एकता में जोड़ने का काम किया। वही काम आज जगद्गुरु रामभद्राचार्य कर रहे हैं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के लिए सीएम योगी ने कहा- वह आम व्यक्ति नहीं, वह जगद्गुरु हैं। उनके द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश का ही नहीं, देश का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में है। वह उस विश्वविद्यालय के अभी भी कुलाधिपति हैं। इसके बावजूद वह भक्तों का सम्मान रखने के लिए रामकथा सुनाते हैं। इसके पीछे एक ही उद्देश्य होता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आचरणों का कोई अनुसरण कर ले तो देश का बहुत बड़ा कल्याण होगा।

नारी सम्मान और दांपत्य मर्यादा पर रामभद्राचार्य का बयान

श्रीराम कथा के आठवें दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पत्नी केवल जीवनसंगिनी नहीं, बल्कि धर्मपत्नी होती है। जो पति को पतन से बचा ले, वही पत्नी कहलाने योग्य है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का संबंध परस्पर सम्मान और मर्यादा पर आधारित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में सर्वोपरि है। मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि माता का स्थान पिता से दस गुना बड़ा माना गया है। उनके अनुसार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जाए तो वह कम नहीं होगा।

कई गणमान्य लोगों ने लिया आशीर्वाद

कथा में पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, मंत्री भूपेंद्र चौधरी, मंत्री जयवीर सिंह, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा, पद्मश्री सुनील जोगी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। विधायक डॉ. नीरज बोरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

मीडिया प्रभारी डॉ. एस.के. गोपाल ने बताया कि समापन दिवस की कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

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