UP News: शहर से 20 किमी दूर अकोला कस्बे में शुक्रवार को सैकड़ों महिलाओं ने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़ लिए। सिर पर मीटर लेकर गांव के बिजली ऑफिस पहुंच गईं और वहां मीटर फेंक दिए। स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला। कई लोग बोरे में भरकर स्मार्ट मीटर लेकर पहुंचे और उन्हें फेंककर विरोध जताया। इसके बाद महिलाएं और ग्रामीण धरने पर बैठ गए। बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिलाओं और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
महिलाओं ने कहा कि स्मार्ट मीटर उन्हें बर्दाश्त नहीं हैं। स्मार्ट मीटरों की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और बिजली बिलों में हो रही अनियमितताओं की जांच कराई जाए।
स्मार्ट मीटर के विरोध का कारण
ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर बहुत तेज चलता है। इससे कम इस्तेमाल करने पर भी ज्यादा बिल आ रहा है। यहां तक की कई बार बिना इस्तेमाल के भी बैलेंस कम हो जाता है। लोगों का कहना है कि बैलेंस माइनस में जाते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है। रिचार्ज के बाद भी कई बार सप्लाई तुरंत बहाल नहीं होती।
स्मार्ट मीटर को कई महीनों से हो रहे विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने सरकार को नया आदेश जारी किया था। इसके मुताबिक, 1 किलोवाट तक के कनेक्शन पर 30 दिन तक और 2 किलोवाट पर 200 रुपए माइनस होने पर भी बिजली नहीं काटने की बात कही गई थी।
भारतीय किसान यूनियन बोली- यूपी में नहीं लगने देगें स्मार्ट मीटर
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया ने कहा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आदेशानुसार यह निर्णय लिया गया है कि यूपी में कहीं भी स्मार्ट मीटर नहीं लगने दिए जाएंगे। अकोला ब्लॉक में किसानों और मजदूरों ने स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर बिजली विभाग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है।
राजवीर लवानिया ने चेतावनी दी कि अगर स्मार्ट मीटर हटाने को लेकर किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या FIR दर्ज की जाती है, तो भारतीय किसान यूनियन चक्का जाम करेगा।
मनमानी नहीं थमी, तो स्मार्ट मीटर उखाड़ फेकेंगे
मेरठ में भारतीय किसान यूनियन आजाद के किसानों ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर पंचायत की। इसमें निर्णय लिया गया कि यदि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की मनमानी नहीं थमी, तो किसान घरों पर लगे स्मार्ट मीटर उखाड़कर विभाग को सौंप देंगे।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन बालियान ने कहा कि जब से गांवों में स्मार्ट मीटर लगने शुरू हुए हैं, तब से किसान आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जबरन स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं। रिचार्ज खत्म होते ही किसानों की बिजली गुल हो जाती है।
अखिलेश बोले– जनता ने चोरी पकड़ी, अगली बार EVM
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर कहा कि भाजपा सरकार ने जनता को लूटने के लिए टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग किया है। प्रीपेड मीटर के नाम पर बिजली में भ्रष्टाचार की लूट मचा रखी है। अब उनकी चोरी जनता ने पकड़ ली है। इस बार स्मार्ट मीटर तोड़ें जा रहे हैं, अगली बार ईवीएम।
भाजपा सरकार ने जनता को लूटने के लिए जो टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करके प्रीपेड मीटर के नाम पर बिजली में भ्रष्टाचार की लूट मचा रखी है। अब उनकी चोरी जनता ने पकड़ ली है। इस बार स्मार्ट मीटर तोड़ें जा रहे हैं अगली बार ईवीएम… pic.twitter.com/xDa8uJ71Lu
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 1, 2026
ग्रामीणों ने कहा– स्मार्ट मीटर से बिजली बिल बढ़ रहे
आगरा के अकोला कस्बे के ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली बिल बढ़ रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ बढ़ रहा। उन्होंने मांग की है कि पुराने मीटर ही रखे जाएं और बिजली विभाग उनकी समस्याओं समाधान करे। आगरा के अकोला कस्बे में सैकड़ों लोग घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़ लिए। इसके बाद मीटर लेकर गांव के बिजली ऑफिस पहुंच गए और वहां मीटर फेंक दिए।
स्मार्ट मीटर पर सरकार ने कहा था– 30 दिन तक बिजली नहीं कटेगी
यूपी सरकार ने एक हफ्ते पहले यानी 24 अप्रैल को स्मार्ट मीटर वाले बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी थी। कहा था- जिन लोगों के घरों में 1 किलोवाट का बिजली कनेक्शन है, अगर उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। दो किलोवाट के उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई थी। कहा था कि अगर बैलेंस माइनस 200 रुपये तक है, तो बिजली सप्लाई नहीं काटी जाएगी।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विरोध की 5 वजहें
- स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बड़ी खामी है, ये मीटर तेज चल रहा है।
- बिना बिजली उपयोग के भी बैलेंस कट जाता है।
- बैलेंस माइनस में होते ही बिजली कट जाती है, लेकिन रिचार्ज पर तुरंत चालू नहीं होती।
- बार-बार रिचार्ज करने से मध्यम परिवारों के घर का बजट बिगड़ जा रहा है।
- स्मार्ट प्रीपेड की समस्याओं का किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही। 1912 की शिकायत को स्वतः बिना समाधान किए बंद कर दिया जाता है।
(बिजली उपभोक्ताओं, बिजली विशेषज्ञों से बात करके और विभाग में आने वाली शिकायतों को देखकर ये कारण सामने आए।)
क्या है स्मार्ट मीटर, पुराने मीटर से अलग कैसे
पुराना मीटर
- मैनुअल मीटर रीडिंग लेनी पड़ती है।
- मीटर के साथ टेम्परिंग संभव।
- बिजली की खपत हो या न हो, महीने के आखिर में बिल।
- इंटरनेट कनेक्शन नहीं।
- मीटर रीडिंग से बिल जनरेट तक की प्रोसेस मैनुअल।
स्मार्ट मीटर
- इंटरनेट से कनेक्ट
- हर 15 मिनट में फोन पर बिजली कंजप्शन अपडेट।
- हैक और टेम्परिंग की गुंजाइश न के बराबर।
- मीटर रीडिंग और बिल जेनरेशन का काम ऑटोमैटिक।
- जितना रिचार्ज, उतना बिजली का इस्तेमाल।

