E20 Petrol: अगर आपके पास पुरानी गाड़ी या दोपहिया वाहन है तो आपकी गाड़ी की सेहत और माइलेज पर असर पड़ने वाला है. 1 अप्रैल 2026 से देशभर में पेट्रोल पंप पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला E20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य हो गया है. सरकार के इस फैसले का मकसद कच्चे तेल और आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण घटना है. हालांकि इस बदलाव का असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनके पास 2023 से पहले की पुरानी गाड़ियां है. ऐसे में चलिए अब आपको यह बताते हैं कि पुरानी गाड़ियों पर E20 पेट्रोल से क्या असर पड़ेगा और इसके नुकसान से कैसे बचा जा सकता है?
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जो गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. इस मिश्रण से पेट्रोल की क्वालिटी बढ़कर करीब 95 प्रतिशत हो जाती है, जिससे इंजन स्मूथ चलता है और नॉकिंग की समस्या कम होती है. वहीं बताया जा रहा है कि अप्रैल 2023 के बाद बनी बीएस6 फेज-2 गाड़ियां E20 पेट्रोल फ्यूल के हिसाब से डिजाइन की गई है. इसलिए इन वाहनों में इस नए पेट्रोल से किसी तरह से परेशानी नहीं होगी.
पुरानी गाड़ियों पर क्या पड़ेगा असर?
वहीं 2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का असर थोड़ा अलग हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार पुराने वाहनों के माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं. वहीं एथेनॉल के कारण पुराने रबर पार्ट्स और फ्यूल पाइप खराब हो सकते हैं. इसके अलावा एथेनॉल हवा में नमी सकता है, जिससे टंकी में पानी बनने का खतरा रहता है. इससे इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत और जंग लगने की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि ऑटोमोबाइल संस्थाओं के अनुसार E20 के इस्तेमाल से किसी बड़े इंजन फेलियर की रिपोर्ट नहीं मिली है.
क्यों जरूरी है एथेनॉल ब्लेंडिंग?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. वहीं एथेनॉल मिलाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, साथ ही पर्यावरण के लिए भी यह बेहतर माना जाता है. क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन घटता है. इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन से किसानों को भी फायदा मिलता है.
E20 पेट्रोल से नुकसान से बचने के आसान तरीके
अगर आपकी गाड़ी पुरानी है तो कुछ सावधानियां अपनाकर आप E20 पेट्रोल से अपनी गाड़ी पर होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं.
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इसके लिए आप रबर पाइप की जगह E20 कम्पैटिबल पाइप लगवाएं.
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इसके अलावा फ्यूल स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करें, क्योंकि यह नमी बनने से रोकता है.
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वहीं फ्यूल फिल्टर समय से पहले बदलें, ताकि गंदगी इंजन तक न पहुंचे.
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इसके अलावा गाड़ी की टंकी खाली न रखें, ज्यादा खाली टंकी में नमी बनने की संभावना बढ़ती है.
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कोशिश करें कि आप गाड़ी को नियमित चलाएं, लंबे समय तक गाड़ी खड़ी रखने से समस्या बढ़ सकती है.
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वहीं गाड़ी का एंटी-कोरोजन ट्रीटमेंट कराएं; धातु टैंक में जंग से बचाव के लिए यह जरूरी होता है.

