ईरान-इजराइल और US के जंग के चलते कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, जानें पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर

ईरान-इजराइल और US के जंग के चलते कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, जानें पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर

US Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम साढ़े तीन साल के हाई पर पहुंच गए हैं। रविवार (08 मार्च) को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। इससे पहले 2022 में कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था।

शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू होते ही ब्रेंट क्रूड 16.5% की उछाल के साथ 108 डॉलर पर पहुंच गया, जो शुक्रवार को 93 डॉलर पर बंद हुआ था। जंग के दौरान यानी 10 दिन में ही कच्चा तेल करीब 48% महंगा हो चुका है। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त तेल है, लिहाजा भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे।

होर्मुज जल मार्ग बंद होने से संकट गहराया

दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। ईरान युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते से ट्रांसपोर्टेशन पर खासा असर पड़ा है। इसके चलते खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई ठप हो गई है। यूएई (UAE) और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों ने भी अपना प्रोडक्शन कम करना शुरू कर दिया है, क्योंकि सप्लाई रूट बंद होने से एक्सपोर्ट करना मुश्किल हो रहा है।

भारत सरकार बोली– हमारे पास पर्याप्त तेल, पेट्रोल-डीजल महंगे नहीं होंगे

भारत सरकार ने 08 मार्च को कहा था कि भारत को कच्चे तेल की कमी नहीं होगी। भारत के पास अभी कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 25 करोड़ बैरल (लगभग 4,000 करोड़ लीटर) से ज्यादा का स्टॉक है।

सरकार की रिपोर्ट के अनुसार यह बैकअप इतना है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए तो भी देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से चल सकती है। यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी की कोई टेंशन नहीं है। सरकार ने 07 मार्च को भी साफ किया था कि पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाएंगे।

रूस से कच्चा तेल खरीदेगा भारत

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 03 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। इससे भारत में कच्चे तेल की कमी की संभावना नहीं है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है।

4 साल से स्थिर हैं कीमतें

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। फरवरी, 2022 से फरवरी, 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 0.67% की मामूली गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है।

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