CM Yogi ने गोरखनाथ मंदिर में की गौ-सेवा, Govardhan Puja की दीं शुभकामनाएं

CM Yogi ने गोरखनाथ मंदिर में की गौ-सेवा, Govardhan Puja की दीं शुभकामनाएं

Gorakhpur News: उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और गौ-सेवा की। इस दौरान उन्होंने गायों को भोजन भी कराया।

मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पूजा को भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था का प्रतीक बताया और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा गौ और गोवंश के महत्व को दर्शाती है, जिसे दीपावली जैसे महापर्व के साथ जोड़कर और भी प्रभावी बनाया गया है।

गौ-संरक्षण और संवर्धन पर जोर

सीएम योगी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि आज उन्हें गौ पूजन और गौ-सेवा का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि भारतीय गोवंश देश की समृद्धि का आधार रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘गोवर्धन योजना’ की सराहना की, जिसके तहत गाय के गोबर से बायो कंपोस्ट और इथेनॉल बनाने के अभिनव कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। ये प्रयास गोवंश के संवर्धन और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके अनुरूप कार्ययोजना भी चला रही है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में 16 लाख गोवंश ऐसे हैं, जिन पर राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। यह प्रयास किसानों की फसलों को गोवंश से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने गोवंश संरक्षण के लिए तीन योजनाओं का उल्लेख किया।

तीन योजनाओं का उल्‍लेख

  • निराश्रित गोशाला योजना: इसके तहत, सरकार प्रत्येक निराश्रित गाय के लिए गोशालाओं को ₹1500 प्रति माह प्रदान करती है।
  • सहभागिता योजना: इस योजना में गोवंश संरक्षण से जुड़ने वाले किसान या परिवार को 4 गोवंश दिए जाते हैं। उन्हें प्रति गाय ₹1500 प्रति माह यानी कुल ₹6000 मासिक सहायता मिलती है।
  • कुपोषित परिवार योजना: इस तीसरी योजना के तहत, कुपोषित माताओं और बच्चों वाले परिवारों को निराश्रित गोशालाओं से गायें मिलती हैं। परिवार गायों की सेवा और दुग्ध उत्पादन करते हैं, जिसके लिए उन्हें ₹1500 प्रति माह दिए जाते हैं।

सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने संतोष व्यक्त किया कि बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे अन्नदाता किसान समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘गोवर्धन योजना’ के तहत संपीड़ित बायोगैस और इथेनॉल उत्पादन के कार्यक्रम शुरू होने से अब किसानों को गोबर का भी मूल्य मिल रहा है।

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