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-फिल्म क्रिटिक की नजर से देखें तो कैसी है जॉली एलएलबी 3
Jolly LLB 3: अक्षय कुमार की लेटेस्ट रिलीज फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ टिकट खिड़की पर धमाकेदार परफॉर्म कर रही है. ये ब्लैक-कॉमेडी लीगल ड्रामा दर्शकों को एंटरटेनमेंट की फुल डोज दे रही है. ओपनिंग वीकेंड में तो इसने बमफाड़ कमाई की थी. चलिए इस फिल्म का रिव्यू करते हैं…
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मजबूत कहानी और संदेश– फिल्म किसानों की जमीन हड़पने जैसे गंभीर मुद्दे को हंसी-मजाक के साथ पेश करती है। यह बैलेंस बनाना आसान नहीं था, लेकिन फिल्म इसमें काफी हद तक सफल रही है।
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बेहतरीन एक्टिंग– सौरभ शुक्ला का जज का किरदार फिल्म की जान है। वे कॉमेडी और सीरियसनेस के बीच परफेक्ट बैलेंस बनाते हैं। गजराज राव का विलेन रोल बेहद रियल लगता है – बिल्कुल आज के जमाने के भ्रष्ट उद्योगपतियों जैसा।
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डायलॉग राइटिंग– फिल्म के डायलॉग्स में पंच है। हंसाते भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करते हैं। खासकर कोर्टरूम के सीन्स में डायलॉग्स का इम्पैक्ट अच्छा है।
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सामाजिक मुद्दों पर फोकस– भट्टा पार्सौल जैसे इलाकों के किसानों की समस्या को मुख्यधारा में लाना फिल्म की बड़ी उपलब्धि है।
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पेसिंग इश्यूज– फिल्म के कुछ हिस्सों में गति धीमी लगती है। खासकर बीच के सीन्स में दर्शकों का ध्यान भटक सकता है।
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प्रीडिक्टेबल प्लॉट– अनुभवी दर्शकों के लिए फिल्म का अंत काफी अनुमानित है। किसान जीतेगा, विलेन हारेगा – यह पहले से ही पता चल जाता है।
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ओवर–द–टॉप कॉमेडी– कई जगह हंसी के चक्कर में स्थिति की गंभीरता कम हो जाती है। कुछ कॉमेडी सीन्स फोर्स्ड लगते हैं।
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कमजोर सपोर्टिंग कैरेक्टर्स– दो जॉली के अलावा बाकी किरदार, खासकर उनकी पत्नियों के रोल्स पूरी तरह डेवलप नहीं हुए हैं।
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टेक्निकल पहलू– कैमरावर्क और एडिटिंग में कोई खास नवीनता नहीं है। सामान्य बॉलीवुड फिल्म जैसा ही लगता है।
जॉली एलएलबी 3 एक वन-टाइम वॉच है। यह फिल्म उन लोगों को पसंद आएगी जो सामाजिक मुद्दों पर आधारित हल्की-फुल्की फिल्में देखना चाहते हैं। सौरभ शुक्ला के फैन्स के लिए तो यह मस्ट-वॉच है। अगर आप केवल एंटरटेनमेंट चाहते हैं तो यह फिल्म ठीक है, लेकिन अगर आप कुछ नया या अलग चाहते हैं तो निराशा हो सकती है।

